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DIL Ke KALAM SE
जज्बात कुचल जायेगें, अरमान साथ छोड़ जायेगें, एक सवाल बना रहेगा इस दिल में, क्या कभी हम किसी का साथ पायेगें, तिनका-तिनका जोडकर बनाया था, जो आशियाँ, क्या कभी हकीकत के आईने में, सजा पायेगें| डूबकर भी हमने उस मंजिल को पा लिया| जहां कभी उस हमसफर से कहा था| “हम हमेशा आपका साथ निभायेगें” कभी हमारी खुशी के लिये दी थी| हजारो कुर्बानियां, अब हम भी अपनी दोस्ती का हर कर्ज चुकाते जायेगें| अ खुदा! तू साथ देना, हमारी इस तन्हा राह में, क्योंकि वे कांरवा, अब हमारा साथ छोड़ जायेगें| आइने टूट जायेगें, तिनके बिखर जायेगें, लेकिन उन जैसे कोई मुसाफिर, शायद कहीं मिल पायेगें|


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